विकास दिव्य कीर्ति सर के साथ जाने पढ़ने का सही समय
परीक्षा का समय एक विद्यार्थी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है जिसमें वह अधिक प्रेशर में होता है अभी के समय में बोर्ड परीक्षा में ज्यादा समय नहीं है ऐसे में कई बार बच्चों के ऊपर बहुत ज्यादा प्रेशर बन जाता है बच्चे कम समय में पूरा सिलेबस करने की कोशिश करते हैं
पढ़ने का सबसे बढ़िया समय
निश्चित तौर पर सबका पढ़ने का अलग-अलग समय होता है कोई सुबह पड़ता है कोई देर रात तक पड़ता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता फर्क पड़ता है तो बस इससे की वह जितने भी समय पड़े जिस भी समय पड़े ईमानदारी से पड़े
बड़ों का कहना
अक्सर हमने अपने घर में बड़े बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा कि सुबह जल्दी उठकर पढ़ो सुबह में पड़ी हुई चीज ज्यादा याद रहती है एवं लंबे समय तक याद रहती है
मन में कंफ्यूजन
ऐसे में बच्चे कंफ्यूज हो जाते हैं किस समय पड़े कौन सा समय उनके लिए सबसे बढ़िया होगा इसलिए बच्चों के इस कंफ्यूजन भ्रम को दूर करने के लिए हम भारत के एक लोकप्रिय शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति सर की कुछ टिप्स लेकर आए हैं
विकास सर के द्वारा दी गई टिप्स
विकास सर की माने तो उनका कहना है की पढ़ने का कोई निश्चित समय हो यह जरूरी नहीं है आप जिस भी समय पढ़ने में कंफर्टेबल हो आप पढ़ सकते हैंचाहे फिर वह रात का हो या दिन का हो या सुबह का हो यह मायने नहीं रखता
अपने हिसाब से पड़े पड़े
विकास सर का कहना है कि जरूरी नहीं है आप सुबह मुर्गे की तरह उठकर जल्दी पड़े बल्कि जब आप सहज महसूस करें या आप कंफर्टेबल हो तब पड़े इससे आपको बेहतर तरीके से समझने में आसानी होगी
टाइम टेबल बनाना जरूरी है
विकास दिव्यकीर्ति सर ने इस बात पर भी गौर दिया है की किसी भी समय पड़े लेकिन एक निश्चित आदत जो आप अपने दैनिक जीवन में अपने उसे तरीके से पढ़ें वह आदत आपकी दैनिक जीवन में सुचारू रूप से रहनी चाहिए मतलब की आपको रोजाना इस समय पढ़ना जरूरी है जो आपने चुना है समय को बार-बार बदलकर पढ़ना मूर्खता कहलाती है
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